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36 वर्षों की सेवा के बाद प्रदीप चंद्र नौटियाल सेवानिवृत्त

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प्रदीप चंद्र नौटियाल सेवानिवृत्ति पर DIET गौचर में भावभीनी विदाई

प्रदीप चंद्र नौटियाल सेवानिवृत्ति के अवसर पर जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान (DIET) गौचर में एक गरिमामय एवं भावनात्मक समारोह का आयोजन किया गया। संस्थान में समाजशास्त्र प्रवक्ता के पद पर कार्यरत वरिष्ठ शिक्षाविद् प्रदीप चंद्र नौटियाल के अधिवर्षिता आयु पूर्ण कर सेवानिवृत्त होने पर संस्थान परिवार ने उन्हें भावभीनी विदाई दी।

इस अवसर पर आयोजित समारोह में संस्थान के अधिकारियों, संकाय सदस्यों, कर्मचारियों, प्रशिक्षुओं तथा उनके परिजनों ने सहभागिता करते हुए उनके दीर्घ एवं प्रेरणादायी शैक्षिक योगदान को याद किया

मुख्य विन्दु

  1. प्रदीप चंद्र नौटियाल सेवानिवृत्ति समारोह
  2. 36 वर्षों का प्रेरणादायी शैक्षिक सफर
  3. प्राचार्य आकाश सारस्वत ने क्या कहा
  4. भावुक हुए प्रदीप चंद्र नौटियाल
  5. उपस्थित रहे अधिकारी एवं प्रशिक्षु
  6. निष्कर्ष

प्रदीप चंद्र नौटियाल सेवानिवृत्ति समारोह में उमड़े शिक्षक और प्रशिक्षु

कार्यक्रम का शुभारंभ स्वागत उद्बोधन के साथ हुआ। समारोह में वक्ताओं ने श्री नौटियाल के लगभग 36 वर्षों के समर्पित शैक्षिक जीवन को याद करते हुए उनके अनुशासन, कार्यनिष्ठा और विद्यार्थियों के प्रति समर्पण की सराहना की।

सभी वक्ताओं ने कहा कि श्री नौटियाल ने अपने पूरे सेवाकाल में शिक्षा की गुणवत्ता सुधारने और विद्यार्थियों के मार्गदर्शन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।


36 वर्षों का प्रेरणादायी शैक्षिक सफर

प्रदीप चंद्र नौटियाल ने 1 दिसंबर 1989 को जनता हाईस्कूल जयपुर कोलसों में सहायक अध्यापक गणित के पद पर अपनी सेवाएं शुरू की थीं।

इसके बाद 27 जनवरी 2001 को जनता इंटर कॉलेज जयपुर कोलसों में प्रवक्ता समाजशास्त्र के पद पर पदोन्नत हुए।

उन्होंने 19 दिसंबर 2008 से जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान गौचर में अपनी सेवाएं प्रदान कीं और सेवानिवृत्ति तक विभिन्न शैक्षिक एवं प्रशिक्षण गतिविधियों में महत्वपूर्ण योगदान दिया।

उनका लगभग 36 वर्षों का सेवाकाल शिक्षा जगत के लिए प्रेरणास्रोत माना जाता है।


प्रदीप चंद्र नौटियाल सेवानिवृत्ति पर बोले प्राचार्य आकाश सारस्वत

जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान के प्राचार्य एवं प्रभारी मुख्य शिक्षा अधिकारी Akash Saraswat आकाश सारस्वत ने कहा कि किसी भी कर्मचारी की सेवानिवृत्ति उसी दिन निर्धारित हो जाती है जिस दिन वह सेवा में प्रवेश करता है, लेकिन उसके कार्य और योगदान ही उसे विशेष बनाते हैं।

उन्होंने कहा कि एक शिक्षक वास्तव में कभी सेवानिवृत्त नहीं होता, बल्कि अपने अनुभव और ज्ञान के माध्यम से जीवनभर समाज को दिशा देता रहता है।

उन्होंने श्री नौटियाल के सेवाकाल को प्रेरणादायी बताते हुए उनके स्वस्थ एवं सक्रिय जीवन की शुभकामनाएं दीं।


भावुक हुए प्रदीप चंद्र नौटियाल

अपने संबोधन में प्रदीप चंद्र नौटियाल ने कहा कि 36 वर्षों की सरकारी सेवा के दौरान उन्हें शिक्षा जगत से जुड़े अनेक महत्वपूर्ण अनुभव प्राप्त हुए।

उन्होंने कहा कि विद्यार्थियों के हितों को सर्वोपरि रखना ही उनके जीवन का उद्देश्य रहा है और यही उनकी सबसे बड़ी उपलब्धि है।

उन्होंने संस्थान परिवार का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि सेवानिवृत्ति केवल सरकारी सेवा से होती है, शिक्षा और समाज सेवा से नहीं। वे आगे भी शिक्षा और सामाजिक गतिविधियों से जुड़े रहेंगे।

प्रदीप चंद्र नौटियाल सेवानिवृत्ति diet

सहयोगियों ने बताया आदर्श शिक्षक

समारोह में उपस्थित वक्ताओं ने उनके सौम्य व्यवहार, शैक्षिक नेतृत्व, प्रशासनिक दक्षता और प्रशिक्षुओं के मार्गदर्शन में निभाई गई भूमिका की सराहना की।

सभी ने उन्हें एक आदर्श शिक्षक बताते हुए उनके स्वस्थ, सुखमय और दीर्घायु जीवन की कामना की।


समारोह में रहे उपस्थित

कार्यक्रम में मुख्य प्रशासनिक अधिकारी राजेश सती, वीरेंद्र सिंह कठैत, रविंद्र सिंह बर्त्वाल, भगत सिंह कंडवाल, बचन जितेला, सुबोध कुमार डिमरी, डॉ. गजपाल राज, नीतू सूद, योगेंद्र सिंह बर्त्वाल, मृणाल जोशी, सुमन भट्ट, मुकेश सिंह राणा, श्रेया कंडारी, ममता रावत, दीपिका एवं मयंक काला सहित अनेक संकाय सदस्य उपस्थित रहे।

इसके अलावा डॉ. मयंक नौटियाल, शशिकांत नौटियाल, भानु प्रकाश मैठाणी तथा डीएलएड प्रथम एवं तृतीय सेमेस्टर के प्रशिक्षुओं ने भी समारोह में सहभागिता की।

कार्यक्रम का संचालन डॉ. कमलेश कुमार मिश्र द्वारा किया गया।

अंत में संस्थान परिवार की ओर से प्रदीप चंद्र नौटियाल को स्मृति चिन्ह एवं सम्मान स्वरूप उपहार भेंट कर भावभीनी विदाई दी गई।


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निष्कर्ष

प्रदीप चंद्र नौटियाल सेवानिवृत्ति केवल एक शिक्षक की विदाई नहीं, बल्कि शिक्षा जगत में उनके अमूल्य योगदान को सम्मान देने का अवसर भी रहा। 36 वर्षों तक शिक्षा के क्षेत्र में दी गई उनकी सेवाएं आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा बनी रहेंगी।


— BURANSH TIMES NEWS

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