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नंदा देवी बड़ी जात यात्रा 2026 में व्यवस्थाओं पर सवाल

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नंदा देवी बड़ी जात यात्रा 2026: निर्जन पड़ावों में व्यवस्थाओं को लेकर उठे सवाल

वाण से गैरोलीपातल और वेदनी बुग्याल तक हजारों श्रद्धालुओं के पहुंचने का अनुमान, यात्रियों को मूलभूत सुविधाओं की चिंता

वाण,देवाल चमोली। बुरांश टाइम्स न्यूज़ | गोविन्द बिष्ट

श्री नंदादेवी बड़ी जात एवं श्री नंदादेवी लोकजात यात्रा अब अपने महत्वपूर्ण पड़ाव की ओर बढ़ रही है। गुरुवार को यात्रा मार्ग के अंतिम आबादी वाले गांव वाण से निर्जन पड़ाव गैरोलीपातल की ओर पहुंचेगी। इसके साथ ही हजारों की संख्या में नंदा भक्तों के सामने यात्रा की वास्तविक कठिनाइयां शुरू होने की संभावना है।

नंदा देवी बड़ी जात यात्रा 2026 में इस बार श्रद्धालुओं की संख्या पहले की अपेक्षा काफी अधिक दिखाई दे रही है। यात्रा में दशोली, बण्ड एवं ज्वालपा देवी की उत्सव डोलियों, नंदा की छंतोलियों और देश-प्रदेश के विभिन्न हिस्सों से पहुंचे श्रद्धालुओं के शामिल होने से यात्रा का स्वरूप ऐतिहासिक बनता नजर आ रहा है।

हालांकि, निर्जन पड़ावों में बिजली, पानी, स्वास्थ्य, शौचालय, ठहरने तथा पैदल मार्गों की व्यवस्थाओं को लेकर यात्रियों और यात्रा समितियों के बीच चिंता बनी हुई है। स्थानीय स्तर पर यह सवाल उठ रहा है कि इतने बड़े जनसमूह के लिए निर्जन क्षेत्रों में मूलभूत सुविधाएं किस प्रकार उपलब्ध कराई जाएंगी।

सरकार और प्रशासन की तैयारियों पर उठ रहे सवाल

यात्रा के अंतिम समय में पुलिस और प्रशासन की सक्रियता बढ़ी है, लेकिन यात्रा मार्ग के निर्जन पड़ावों में मूलभूत सुविधाओं की उपलब्धता को लेकर असमंजस की स्थिति बनी हुई है।

यात्रा से जुड़े लोगों का कहना है कि पुलिस और प्रशासन के अधिकारी स्वयं अपनी व्यवस्थाओं को लेकर आगे बढ़ रहे हैं। ऐसे में यात्रियों के लिए पर्याप्त सुविधाएं उपलब्ध कराए जाने की उम्मीद कम दिखाई दे रही है।

स्थानीय लोगों के अनुसार, यदि समय रहते गैरोलीपातल, वेदनी बुग्याल, पातरनचौणियां, बागुवाबासा, शीलासमुद्र, तालुंग अथवा तालम्न और नारिंग खोपड़ी जैसे निर्जन पड़ावों में आवश्यक व्यवस्थाएं की जातीं, तो यात्रियों को काफी राहत मिल सकती थी।

चार रातें निर्जन पड़ावों में गुजारेंगे यात्री

श्री नंदादेवी बड़ी जात यात्रा के दौरान यात्रियों को कम से कम चार रातें निर्जन पड़ावों में गुजारनी पड़ सकती हैं। यात्रा मार्ग में आगे बढ़ने पर आबादी और बाजार जैसी सुविधाएं उपलब्ध नहीं होंगी।

ऐसे में यात्रियों को अपने साथ मैट्रेस, स्लीपिंग बैग, गर्म कपड़े, भोजन सामग्री और ड्राई फ्रूट्स जैसी आवश्यक वस्तुएं लेकर चलना पड़ रहा है। वर्ष 2000 और 2014 की राजजात यात्राओं में शामिल रहे कई श्रद्धालु इस बार भी अपने निजी संसाधनों के साथ यात्रा कर रहे हैं।

यात्रियों का कहना है कि उच्च हिमालयी क्षेत्र में मौसम तेजी से बदल सकता है। ऐसे में स्वास्थ्य सेवाओं, पेयजल, शौचालय और रात्रि विश्राम की व्यवस्था बेहद जरूरी है।

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2026 की राजजात स्थगित होने के बाद बड़ी जात का आयोजन

परंपरागत रूप से श्री नंदादेवी लोकजात यात्रा प्रत्येक वर्ष भाद्रपद मास में श्रीकृष्ण जन्माष्टमी के बाद सिद्धपीठ कुरुड़ से शुरू होकर वेदनी बुग्याल तक जाती है। इसके बाद देवी की डोली सिद्धपीठ देवरगाड़ा-थराली मंदिर में छह माह के प्रवास के लिए विराजमान होती है।

वहीं श्री नंदादेवी राजराजेश्वरी राजजात अथवा बड़ी जात का आयोजन सामान्यतः 12 वर्ष या उसके बाद किया जाता है। वर्ष 2026 में प्रस्तावित राजजात को स्थगित कर 2027 में आयोजित किए जाने के निर्णय के बाद सिद्धपीठ कुरुड़ से श्री नंदादेवी बड़ी जात के आयोजन पर सर्वसम्मति बनी।

इसके बाद बड़ी जात आयोजन समिति द्वारा पिछले कई महीनों से यात्रा का प्रचार-प्रसार किया जा रहा था। परिणामस्वरूप इस बार यात्रा में श्रद्धालुओं की संख्या में उल्लेखनीय वृद्धि देखी जा रही है।

यात्रा में उमड़ रहा श्रद्धालुओं का सैलाब

बुधवार सुबह से देर शाम तक थराली, देवाल, ग्वालदम, नंदकेशरी और वाण होते हुए बड़ी संख्या में यात्री आगे के पड़ावों के लिए रवाना हुए। गुरुवार सुबह से भी यात्रियों के पहुंचने का सिलसिला जारी रहने की संभावना है।

नंदानगर घाट क्षेत्र से आ रही नंदादेवी दशोली परगना, नंदादेवी बण्ड परगना और ज्वालपा देवी की उत्सव डोलियों के साथ बड़ी संख्या में नंदा छंतोलियां भी कैलाश गमन के लिए रवाना हुई हैं।

स्थानीय श्रद्धालुओं के अलावा उत्तराखंड के अन्य जिलों और देश के विभिन्न हिस्सों से आए भक्तों के कारण यात्रा मार्ग पर काफी भीड़ दिखाई दे रही है। अनुमान लगाया जा रहा है कि 17 सितम्बर को गैरोलीपातल और वेदनी बुग्याल में हजारों की संख्या में नंदा भक्त एकत्र हो सकते हैं।

डोलियों के आगे बढ़ने का कार्यक्रम

श्री नंदादेवी राजराजेश्वरी समिति बधाण, थराली की ओर से जारी यात्रा कार्यक्रम के अनुसार बधाण की नंदादेवी की डोली रोहिणी कुंड में तर्पण तथा नंदा देवी मंदिर में पूजा-अर्चना के बाद सिद्धपीठ देवरगाड़ा के लिए लौटेगी।

वहीं दशोली, बण्ड और ज्वालपा देवी की डोलियां कैलाश गमन के तहत होमकुंड की ओर प्रस्थान करेंगी। इस दौरान यात्रियों को कई दुर्गम और निर्जन पड़ावों से होकर गुजरना होगा।

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रूपकुंड ट्रैक बंद होने से बढ़ सकती है यात्रा में भीड़

वन विभाग द्वारा रहस्यमयी रूपकुंड साहसिक ट्रैक को पर्यटकों के लिए बंद किए जाने तथा बुग्यालों में रात्रि प्रवास की अनुमति केवल धार्मिक यात्रा के लिए दिए जाने के कारण कई लोग नंदा देवी बड़ी जात में शामिल होकर उच्च हिमालयी क्षेत्रों का दर्शन करने का प्रयास कर रहे हैं।

यात्रा से जुड़े लोगों का मानना है कि वाण गांव से रूपकुंड ट्रैक बंद होने के बाद कई पर्यटक और श्रद्धालु वेदनी से आगे बढ़ने का प्रयास कर सकते हैं। इससे निर्जन पड़ावों में यात्रियों की संख्या और बढ़ सकती है।

आस्था के सहारे आगे बढ़ रहे श्रद्धालु

यात्रा समितियों और श्रद्धालुओं में व्यवस्थाओं को लेकर चिंता जरूर है, लेकिन नंदा देवी के प्रति आस्था और विश्वास के कारण यात्रियों के हौसले बुलंद हैं। दशोली, बण्ड और ज्वालपा देवी कमेटियों के साथ यात्रा में शामिल श्रद्धालु अपने निजी संसाधनों के सहारे आगे बढ़ने को तैयार हैं।

नंदा देवी बड़ी जात यात्रा 2026 पहाड़ की धार्मिक, सांस्कृतिक और सामाजिक आस्था से जुड़ी महत्वपूर्ण यात्रा है। ऐसे में यात्रियों की सुरक्षा, स्वास्थ्य और मूलभूत सुविधाओं को लेकर उठ रहे सवालों पर संबंधित विभागों को गंभीरता से ध्यान देना होगा।

यात्रा की सफलता केवल श्रद्धालुओं की संख्या या धार्मिक आयोजन से नहीं, बल्कि यात्रियों की सुरक्षित आवाजाही और आवश्यक व्यवस्थाओं से भी तय होगी।

मुख्य बिंदु

  • निर्जन पड़ावों में मूलभूत सुविधाओं को लेकर चिंता।
  • पुलिस और प्रशासन की व्यवस्थाओं पर स्थानीय स्तर पर सवाल।
  • गैरोलीपातल और वेदनी बुग्याल में हजारों श्रद्धालुओं के पहुंचने का अनुमान।
  • बड़ी जात के यात्रियों को कई रातें निर्जन पड़ावों में गुजारनी होंगी।
  • दशोली, बण्ड और ज्वालपा देवी की डोलियां कैलाश गमन के लिए रवाना।
  • रूपकुंड ट्रैक बंद होने से वेदनी से आगे यात्रियों की संख्या बढ़ने की संभावना।
  • श्रद्धालु निजी संसाधनों और नंदा देवी की आस्था के सहारे यात्रा कर रहे हैं।

बुरांश टाइम्स न्यूज़

रिपोर्ट: गोविन्द बिष्ट स्थान: गौचर, चमोली प्रकाशन: Buransh Times News वेबसाइट: buranshtimes.in 

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