हरेला पर्व पर गौचर में वृक्षारोपण: पत्रकार, आईटीबीपी और ग्रामीणों ने दिया पर्यावरण संरक्षण का संदेश
गौचर (चमोली), 12 जुलाई 2026।
हरेला पर्व पर गौचर में वृक्षारोपण अभियान इस वर्ष केवल एक औपचारिक कार्यक्रम नहीं रहा, बल्कि पर्यावरण संरक्षण का जीवंत उदाहरण बनकर सामने आया। उत्तराखंड के लोकपर्व हरेला के अवसर पर ग्राम बन्दरखण्ड स्थित अलकनंदा नदी तट के शिवालय मंदिर परिसर में भारती श्रमजीवी पत्रकार संघ, उत्तराखण्ड की जनपद चमोली इकाई के नेतृत्व में आयोजित वृक्षारोपण एवं स्वच्छता अभियान ने यह संदेश दिया कि प्रकृति की रक्षा तभी संभव है, जब समाज का हर वर्ग एक साथ आगे आए।
पत्रकार, आईटीबीपी और ग्रामीणों की अनूठी सहभागिता
हरेला पर्व पर गौचर में वृक्षारोपण कार्यक्रम की सबसे बड़ी विशेषता यह रही कि इसमें पत्रकारों के साथ भारतीय तिब्बत सीमा पुलिस (आईटीबीपी) के जवान, वन विभाग, उद्यान विभाग, नगर पालिका गौचर, महिला मंगल दल, युवक मंगल दल और स्थानीय ग्रामीणों ने एकजुट होकर भागीदारी निभाई। सामूहिक प्रयासों ने यह साबित किया कि पर्यावरण संरक्षण किसी एक संस्था का नहीं, बल्कि पूरे समाज का दायित्व है।
अलकनंदा तट पर चला स्वच्छता और पौधरोपण अभियान
सुबह से ही शिवालय मंदिर परिसर एवं अलकनंदा नदी तट पर सफाई अभियान शुरू किया गया। आईटीबीपी की 8वीं वाहिनी के जवानों ने सेनानी मनोहर सिंह रावत के नेतृत्व में झाड़ियों की सफाई कर पौधरोपण के लिए भूमि तैयार की।
इसके बाद वन विभाग धनपुर रेंज के वन क्षेत्राधिकारी नवल किशोर नेगी ने औषधीय, छायादार एवं फलदार पौधे उपलब्ध कराए। उद्यान विभाग ने भी फलदार पौधों का वितरण किया, जबकि नगर पालिका गौचर के पर्यावरण मित्रों ने पूरे परिसर की सफाई कर स्वच्छ वातावरण का संदेश दिया।
हरेला गीतों से गूंज उठा वातावरण
कार्यक्रम का सबसे भावुक और प्रेरणादायी क्षण तब आया जब महिला मंगल दल की महिलाओं ने पारंपरिक हरेला गीत प्रस्तुत किए। लोक संस्कृति और प्रकृति के प्रति आस्था से जुड़े इन गीतों ने पूरे वातावरण को उल्लास और हरियाली के रंगों से भर दिया।
पर्यावरण संरक्षण की दिलाई शपथ
भारती श्रमजीवी पत्रकार संघ, चमोली के जिला अध्यक्ष दिगपाल गुंसाई ने सभी प्रतिभागियों को पर्यावरण संरक्षण की शपथ दिलाई। उन्होंने कहा कि पौधरोपण तभी सार्थक होगा, जब लगाए गए पौधों की नियमित देखभाल भी की जाए।
उन्होंने कहा कि संगठन भविष्य में भी सरकार एवं विभिन्न विभागों के सहयोग से जनहित और पर्यावरण संरक्षण से जुड़े अभियान लगातार संचालित करता रहेगा।
आज की सबसे बड़ी जरूरत है सामूहिक भागीदारी
आज जलवायु परिवर्तन, जंगलों में बढ़ती आग, सूखते जलस्रोत और प्रदूषण जैसी चुनौतियां पूरी दुनिया के सामने हैं। ऐसे समय में हरेला पर्व पर गौचर में वृक्षारोपण जैसे सामुदायिक अभियान समाज को नई दिशा देते हैं।
हरेला का वास्तविक संदेश यही है कि प्रकृति से जितना प्राप्त करें, उससे कहीं अधिक उसे लौटाने का प्रयास करें। अलकनंदा तट पर लगाए गए पौधे आने वाले वर्षों में केवल हरियाली ही नहीं देंगे, बल्कि आने वाली पीढ़ियों को पर्यावरण संरक्षण का संदेश भी देंगे।
अनेक गणमान्य नागरिक रहे उपस्थित
इस अवसर पर आईटीबीपी के उपसेनानी विनोद कुमार, दर्शन लाल, बीट अधिकारी सम्पत सिंह रावत, राजकिशोर थपलियाल, वन क्षेत्राधिकारी नवल किशोर नेगी, उद्यान विभाग के नरेन्द्र बिष्ट, जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के देवेन्द्र कुमार, बन्दरखण्ड समिति के अध्यक्ष जगदीश सिंह कनवासी, सभासद विनोद कनवासी, मदन सिंह कनवासी, दिलवर सिंह बिष्ट, रामभगत भण्डारी, राजेश कनवासी, मयंक धरियाल, महिला मंगल दल अध्यक्ष सतेश्वरी देवी, विजया गुंसाई, राजेश्वरी बिष्ट, उर्मिला धरियाल, जशोन्दरा कनवासी, सोपती देवी, पूनम कनवासी, मनोरमा गुंसाई, मिलन भण्डारी, भारती श्रमजीवी पत्रकार संघ के जिला महामंत्री के.एस. असवाल, प्रदीप लखेड़ा, अरुण मिश्रा, देवेन्द्र गुंसाई, भानु प्रकाश नेगी, गोविन्द सिंह बिष्ट, लक्ष्मण सिंह पटवाल तथा लोक जन कल्याण सेवा समिति के अध्यक्ष सुनील पंवार सहित अनेक गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे।
महिला संगठन की ओर से उपस्थित सदस्य
महिला संगठन की अध्यक्ष सतेश्वरी कनवासी, विनीता भंडारी, सरिता भंडारी, जौसी भंडारी, दीपा भंडारी, शकुंतला भंडारी, पूनम कनवासी, पुनीता कनवासी, प्रभा कनवासी, आशा कनवासी, संतोषी, अरूणा, गुड्डी, निधि, बिमला, रामेश्वरी, राजेश्वरी, उर्मिला, शशि, सोबती, जमनोत्री, सुशीला, आशा, बीना, माधुरी, मनोरमा, कंचन, जशुंधरा, किसमती, जशोदा, सावित्री, सुषमा, विजया, नीलम, सुनीता, अंजलि, उर्मिला, तथा रामभरत, मिलन, मयंक, गौरव, अवशेक, राजे सिंह, दिलबर, मदन कनवासी सहित बड़ी संख्या में स्थानीय ग्रामीण एवं सामाजिक कार्यकर्ता उपस्थित रहे।
BURANSH TIMES NEWS
रिपोर्ट- GOVIND BISHT
हरेला पर्व पर गौचर में वृक्षारोपण पर महिलाओ द्वारा सुन्दर गीत

