सचिवालय घेराव 8 अक्टूबर 2026: देवाल के प्रधानों का ऐलान,
सचिवालय घेराव को देवाल के प्रधानों ने भरी हुंकार, 10 सूत्रीय मांगों को लेकर 8 अक्टूबर को देहरादून कूच
प्रधान संगठन देवाल का बड़ा आंदोलन, मनरेगा से लेकर ग्राम पंचायतों के वित्तीय अधिकारों तक उठेगी आवाज; सुबह 10 बजे परेड ग्राउंड में जुटेंगे प्रधान
देवाल/चमोली। ग्राम पंचायतों और ग्राम प्रधानों की विभिन्न मांगों को लेकर प्रधान संगठन देवाल (चमोली) ने आंदोलन का ऐलान किया है। संगठन की ओर से जारी पोस्टर के अनुसार 8 अक्टूबर 2026 को देहरादून में सचिवालय घेराव किया जाएगा। संगठन ने अधिक से अधिक संख्या में प्रधान साथियों से देहरादून परेड ग्राउंड के बाहर एकत्रित होने का आह्वान किया है।
प्रधान संगठन देवाल ने ग्राम पंचायतों से जुड़े अधिकारों, मनरेगा में मजदूरों की उपस्थिति, ग्राम पंचायतों की वित्तीय स्थिति, पंचायत विभागों के अधिकारों और ग्राम प्रधानों के मानदेय सहित कुल 10 सूत्रीय मांगों को लेकर सरकार का ध्यान आकर्षित करने का निर्णय लिया है।
संगठन के अनुसार सभी प्रधान साथी 8 अक्टूबर 2026 को सुबह 10 बजे देहरादून परेड ग्राउंड के बाहर एकत्रित होंगे और इसके बाद सुबह 11 बजे सचिवालय की ओर प्रस्थान करेंगे।
10 सूत्रीय मांगों को लेकर आंदोलन
प्रधान संगठन देवाल की ओर से उठाई गई 10 सूत्रीय मांगों में ग्राम पंचायतों और ग्राम प्रधानों से जुड़े कई महत्वपूर्ण विषय शामिल हैं। संगठन का कहना है कि इन मांगों का सीधा संबंध ग्रामीण विकास और पंचायत व्यवस्था को मजबूत करने से है।
1. मनरेगा और VBG-RAM योजना में मजदूरों की उपस्थिति
संगठन की प्रमुख मांग है कि मनरेगा/VBG RAM व योजना में श्रमिकों की उपस्थिति ऑफलाइन की जाए। साथ ही अकुशल मजदूरों के लिए 600 रुपये तथा कुशल मजदूरों के लिए 800 रुपये प्रतिदिन मजदूरी किए जाने की मांग उठाई गई है।
प्रधान संगठन का कहना है कि ग्रामीण क्षेत्रों में मनरेगा जैसे रोजगार कार्यक्रम ग्रामीण परिवारों के लिए महत्वपूर्ण हैं और मजदूरी तथा उपस्थिति व्यवस्था को व्यवहारिक बनाया जाना जरूरी है।
2. राज्य और केंद्रीय वित्त की धनराशि बढ़ाने की मांग
दूसरी प्रमुख मांग राज्य वित्त एवं केंद्रीय वित्त की धनराशि को जनसंख्या और भौगोलिक क्षेत्रफल के आधार पर बढ़ाने से संबंधित है।
पर्वतीय क्षेत्रों में ग्राम पंचायतों का भौगोलिक विस्तार अधिक होने के कारण विकास कार्यों की लागत भी बढ़ जाती है। ऐसे में संगठन चाहता है कि पंचायतों को उपलब्ध वित्तीय संसाधनों का निर्धारण केवल जनसंख्या के आधार पर नहीं बल्कि भौगोलिक परिस्थितियों को ध्यान में रखकर भी किया जाए।
3. जिला योजना के प्रस्तावों को ग्राम पंचायत खुली बैठक से मंजूरी
प्रधान संगठन की तीसरी मांग है कि जिला योजना के प्रस्ताव ग्राम पंचायत की खुली बैठक में पारित किए जाएं और प्रधान संगठन को नामित सदस्य बनाया जाए।
संगठन का मानना है कि ग्राम स्तर पर विकास योजनाओं की वास्तविक जरूरतों की जानकारी ग्राम पंचायतों और ग्रामीणों को अधिक होती है। इसलिए योजना तैयार करने की प्रक्रिया में ग्राम पंचायतों की भागीदारी जरूरी है।
4. पंचायतों को 29 विभागों का हस्तांतरण
संगठन ने पंचायती राज एक्ट के सभी 29 विभागों को पंचायतों को हस्तांतरित किए जाने की मांग भी उठाई है।
प्रधानों का कहना है कि पंचायतों को अधिकार और जिम्मेदारियां तभी प्रभावी रूप से निभाने का अवसर मिलेगा, जब उन्हें आवश्यक विभागीय अधिकार और संसाधन भी उपलब्ध कराए जाएं।
5. विद्यालय/संसार निधि का ग्राम पंचायतों में उपयोग
पांचवीं मांग में विद्यालय/संसार निधि को दर्जन भर ग्राम पंचायत निधि में बनाई जाने की बात पोस्टर में रखी गई है। संगठन की मांग है कि ग्रामीण स्तर पर उपलब्ध संसाधनों का उपयोग स्थानीय आवश्यकताओं और विकास कार्यों के लिए प्रभावी तरीके से किया जाए।
6. 10 लाख रुपये तक के कार्यों की कार्यदायी संस्था ग्राम पंचायत हो
प्रधान संगठन ने मांग की है कि 10 लाख रुपये तक के विकास कार्यों की कार्यदायी संस्था ग्राम पंचायत को बनाया जाए।
संगठन का तर्क है कि छोटे विकास कार्यों को स्थानीय स्तर पर ग्राम पंचायत के माध्यम से कराया जाए तो ग्रामीण जरूरतों के अनुसार काम तेजी से और अधिक प्रभावी तरीके से हो सकते हैं।
7. ग्राम प्रधानों का स्वास्थ्य और जीवन बीमा
आंदोलन की महत्वपूर्ण मांगों में ग्राम प्रधानों का स्वास्थ्य बीमा और जीवन बीमा कराए जाने की मांग भी शामिल है।
प्रधान संगठन का कहना है कि ग्राम प्रधान गांव के विकास और जनसमस्याओं के समाधान में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। ऐसे में उनके लिए सामाजिक और आर्थिक सुरक्षा से जुड़ी व्यवस्थाएं भी जरूरी हैं।
8. पीएम आवास प्लस सर्वे 2024 के पात्र लाभार्थियों को प्राथमिकता
संगठन ने पीएम आवास प्लस सर्वे 2024 के पात्र लाभार्थियों को प्राथमिकता सूची में शामिल किए जाने की मांग की है।
ग्रामीण क्षेत्रों में गरीब और जरूरतमंद परिवारों के लिए आवास योजना महत्वपूर्ण है। संगठन चाहता है कि सर्वे में पात्र पाए गए परिवारों को योजना का लाभ प्राथमिकता के आधार पर मिले।
9. ग्राम पंचायतों पर लगाए गए टैक्स से संबंधित मांग
नौवीं मांग में 16वें वित्त से ग्राम पंचायतों पर अनिवार्य टैक्स तथा 20वीं केंद्रीय के आदेश में संशोधन किए जाने की मांग रखी गई है।
प्रधान संगठन का कहना है कि पंचायतों पर वित्तीय दायित्व बढ़ने के साथ स्थानीय निकायों के अधिकारों और आर्थिक संसाधनों के बीच संतुलन होना आवश्यक है।
10. ग्राम प्रधान और वार्ड सदस्यों के मानदेय की मांग
दसवीं मांग में ग्राम प्रधानों को 20 हजार रुपये मानदेय और वार्ड सदस्यों को खुली बैठक में भागीदारी पर मानदेय दिए जाने की मांग की गई है।
संगठन का कहना है कि ग्राम प्रधान और वार्ड सदस्य ग्रामीण स्तर पर लगातार जनता के बीच काम करते हैं। पंचायतों की जिम्मेदारियां बढ़ने के साथ उनके मानदेय और सुविधाओं पर भी सरकार को विचार करना चाहिए।
8 अक्टूबर को देहरादून में जुटने का आह्वान
प्रधान संगठन देवाल ने अपने सभी प्रधान साथियों से अधिक से अधिक संख्या में आंदोलन में शामिल होने की अपील की है। पोस्टर के अनुसार 8 अक्टूबर 2026 को सुबह 10 बजे देहरादून परेड ग्राउंड के बाहर एकत्रित होने और इसके बाद सुबह 11 बजे सचिवालय की ओर प्रस्थान करने का कार्यक्रम निर्धारित किया गया है।
संगठन ने इसे ग्राम पंचायतों के अधिकारों और ग्रामीण विकास से जुड़े मुद्दों को मजबूती से उठाने का अवसर बताया है।
पंचायतों के अधिकारों और संसाधनों का मुद्दा केंद्र में
इस आंदोलन में केवल ग्राम प्रधानों के मानदेय का विषय ही नहीं बल्कि पंचायतों को अधिक अधिकार और वित्तीय संसाधन उपलब्ध कराने की मांग भी प्रमुखता से सामने आई है।
ग्राम पंचायतें ग्रामीण क्षेत्रों में सड़क, पेयजल, स्वच्छता, छोटे विकास कार्य, सामुदायिक परिसंपत्तियों और स्थानीय जरूरतों से जुड़े अनेक कार्यों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। ऐसे में प्रधान संगठन का कहना है कि पंचायतों को जिम्मेदारियों के अनुरूप पर्याप्त अधिकार और बजट मिलना चाहिए।
देवाल से उठी आवाज अब राजधानी तक
प्रधान संगठन देवाल की ओर से प्रस्तावित सचिवालय घेराव के जरिए चमोली के पर्वतीय क्षेत्र से जुड़े पंचायत संबंधी मुद्दों को राजधानी देहरादून तक पहुंचाने की तैयारी है। संगठन की 10 सूत्रीय मांगों में मनरेगा मजदूरी, पंचायतों का वित्त, विभागों का हस्तांतरण, विकास कार्यों की कार्यदायी संस्था, बीमा, प्रधानमंत्री आवास और प्रधानों के मानदेय जैसे मुद्दे शामिल हैं।
अब देखना होगा कि 8 अक्टूबर को प्रस्तावित आंदोलन के बाद सरकार और संबंधित विभाग इन मांगों पर क्या रुख अपनाते हैं।
एकता, संघर्ष और पंचायत अधिकारों की आवाज
प्रधान संगठन देवाल का संदेश स्पष्ट है कि ग्राम पंचायतों को मजबूत किए बिना ग्रामीण विकास को गति नहीं दी जा सकती। संगठन ने सभी प्रधान साथियों से एकजुट होकर आंदोलन में शामिल होने का आह्वान किया है।
8 अक्टूबर को देहरादून में होने वाला सचिवालय घेराव अब देवाल के ग्राम प्रधानों की 10 सूत्रीय मांगों को सरकार तक पहुंचाने का महत्वपूर्ण मंच बनने जा रहा है।
रिपोर्ट: बुरांश टाइम्स न्यूज़, चमोली–उत्तराखण्ड समाचार

