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चमोली काश्तकार सब्जी विपणन योजना: किसानों को बड़ी राहत

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चमोली काश्तकार सब्जी विपणन योजना: अब सीधे आईटीबीपी को बेच सकेंगे सब्जियां

चमोली, 8 मई 2026। चमोली काश्तकार सब्जी विपणन योजना के तहत अब सीमांत जनपद चमोली के काश्तकार सीधे भारत-तिब्बत सीमा पुलिस बल (आईटीबीपी) को अपनी सब्जियां बेच सकेंगे। उत्तराखण्ड औद्यानिक परिषद द्वारा काश्तकारों की आय बढ़ाने के उद्देश्य से आईटीबीपी के साथ महत्वपूर्ण अनुबंध किया गया है।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में राज्य सरकार किसानों और काश्तकारों की आय बढ़ाने के लिए लगातार योजनाबद्ध तरीके से कार्य कर रही है। इसी दिशा में उत्तराखण्ड औद्यानिक परिषद ने 1 अप्रैल 2026 को स्थानीय काश्तकारों से सब्जी क्रय करने हेतु आईटीबीपी के साथ अनुबंध किया।


  1. चमोली काश्तकार सब्जी विपणन योजना क्या है
  2. आईटीबीपी से हुआ अनुबंध
  3. पहली खेप हुई रवाना
  4. किसानों को कितना मिला लाभ
  5. काश्तकारों ने क्या कहा
  6. सरकार की योजना से बढ़ेगी आय
  7. निष्कर्ष

चमोली काश्तकार सब्जी विपणन योजना क्या है

चमोली काश्तकार सब्जी विपणन योजना का मुख्य उद्देश्य सीमांत क्षेत्रों के किसानों और काश्तकारों को उनकी उपज का सीधा बाजार उपलब्ध कराना है।

अब स्थानीय किसानों को अपनी सब्जियों के विपणन के लिए दूर-दराज बाजारों में भटकना नहीं पड़ेगा। आईटीबीपी सीधे स्थानीय उत्पादों की खरीद करेगी, जिससे किसानों को उचित मूल्य मिल सकेगा।


आईटीबीपी से हुआ महत्वपूर्ण अनुबंध

उत्तराखण्ड औद्यानिक परिषद द्वारा आईटीबीपी के साथ किया गया यह अनुबंध सीमांत क्षेत्रों के किसानों के लिए बड़ी राहत माना जा रहा है।

इस समझौते के तहत जोशीमठ के बड़ागांव सहित आसपास के क्षेत्रों के कृषक उत्पादक संगठनों को सब्जी विपणन व्यवस्था से जोड़ा गया है।

सरकार का मानना है कि चमोली काश्तकार सब्जी विपणन योजना से किसानों की आय में उल्लेखनीय बढ़ोतरी होगी।


पहली खेप हुई रवाना

शुक्रवार को ज्योतिर्मठ के बड़ागांव स्थित भद्रेश्वर कृषक उत्पादक संगठन द्वारा योजना के तहत सब्जियों की पहली खेप रवाना की गई।

उपजिलाधिकारी चंद्रशेखर वशिष्ठ ने वाहन को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया।

पहली खेप में किसानों द्वारा:

  • 50 किलोग्राम मटर
  • 8 किलोग्राम लहसुन
  • 50 किलोग्राम राई
  • 5 किलोग्राम धनिया
  • 5 किलोग्राम चुकन्दर

की आपूर्ति की गई।

इससे स्थानीय काश्तकारों को करीब 9 हजार रुपये की आय प्राप्त हुई।

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किसानों को मिलेगा सीधा लाभ

चमोली काश्तकार सब्जी विपणन योजना के तहत किसानों को अब अपनी उपज बेचने के लिए बिचौलियों पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा।

सीधे आईटीबीपी को सब्जियों की आपूर्ति होने से किसानों को बेहतर दाम और समय पर भुगतान मिल सकेगा।

विशेषज्ञों का मानना है कि यह योजना सीमांत क्षेत्रों की अर्थव्यवस्था को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।


काश्तकारों ने क्या कहा

स्थानीय काश्तकार मोहन सिंह कम्दी और सुखदेव सिंह ने सरकार की इस पहल की सराहना की।

उन्होंने कहा कि चमोली काश्तकार सब्जी विपणन योजना स्थानीय किसानों के लिए बेहद लाभकारी साबित होगी। अब किसानों को अपने उत्पादों के विपणन के लिए इधर-उधर भटकना नहीं पड़ेगा।

किसानों ने उम्मीद जताई कि भविष्य में योजना का दायरा और बढ़ाया जाएगा।


सरकार की योजना से बढ़ेगी आय

उत्तराखण्ड औद्यानिक परिषद का कहना है कि इस योजना के तहत अधिक से अधिक कृषक संगठनों को जोड़ा जाएगा।

इससे स्थानीय उत्पादन को बढ़ावा मिलेगा और किसानों की आर्थिक स्थिति मजबूत होगी।

राज्य सरकार कृषि और बागवानी क्षेत्र को मजबूत बनाने के लिए लगातार नई योजनाओं पर कार्य कर रही है।


निष्कर्ष

चमोली काश्तकार सब्जी विपणन योजना सीमांत क्षेत्रों के किसानों के लिए नई उम्मीद बनकर सामने आई है।

आईटीबीपी के साथ हुए इस अनुबंध से किसानों को सीधा बाजार मिलेगा, जिससे उनकी आय में वृद्धि होने के साथ-साथ स्थानीय कृषि को भी मजबूती मिलेगी।

यह योजना आने वाले समय में उत्तराखंड के अन्य सीमांत जिलों के लिए भी मॉडल बन सकती है।

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