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चमोली दुआ स्कूल जर्जर भवन: 22 बच्चों की पढ़ाई खतरे में

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चमोली दुआ स्कूल जर्जर भवन: 22 बच्चों की पढ़ाई खतरे में, ग्रामीणों ने उठाई नई मांग

चमोली दुआ स्कूल जर्जर भवन का मामला अब गंभीर होता जा रहा है।
कर्णप्रयाग क्षेत्र के ग्राम पंचायत दुआ स्थित राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय में पढ़ने वाले 22 बच्चों की सुरक्षा पर बड़ा सवाल खड़ा हो गया है।

बरसात से पहले स्कूल भवन की खराब हालत ने अभिभावकों और ग्रामीणों की चिंता और बढ़ा दी है।


जर्जर भवन में चल रही पढ़ाई

विद्यालय की स्थिति बेहद खराब बताई जा रही है।

  • दीवारों में गहरी दरारें पड़ चुकी हैं
  • बरामदा पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो चुका है
  • टीन की छत से बारिश में पानी टपकता है

इसके कारण, बच्चों की पढ़ाई लगातार बाधित हो रही है।
वहीं, हर दिन दुर्घटना का खतरा भी बना रहता है।


बारिश से पहले बढ़ी चिंता

मानसून नजदीक आते ही खतरा और बढ़ गया है।

यदि समय रहते भवन की मरम्मत या नया निर्माण नहीं हुआ,
तो बड़ा हादसा हो सकता है।

ग्रामीणों का कहना है कि यह विद्यालय रानीगढ़ क्षेत्र का एक महत्वपूर्ण स्कूल है।
इसके बावजूद, इसकी स्थिति लगातार नजरअंदाज की जा रही है।


भूमि दान के बावजूद निर्माण कार्य ठप

ग्रामीणों ने स्कूल भवन निर्माण के लिए पहल भी की है।

  • तीन नाली भूमि दान की गई
  • कई बार शासन-प्रशासन को ज्ञापन भेजे गए

लेकिन, अब तक निर्माण कार्य शुरू नहीं हो सका।


ग्रामीणों और अभिभावकों की नाराजगी

ग्राम प्रधान महावीर रावत ने चेतावनी दी:

  • जल्द नया भवन नहीं बना तो बड़ा हादसा हो सकता है

अभिभावक विनिता देवी ने कहा:

  • बच्चे डर के माहौल में पढ़ाई कर रहे हैं
  • पढ़ाई पर भी इसका बुरा असर पड़ रहा है

इससे, शिक्षा व्यवस्था पर भी सवाल उठ रहे हैं।


शिक्षा विभाग का क्या कहना है?

मुख्य शिक्षा अधिकारी आकाश सारस्वत के अनुसार:

  • भवन निर्माण का प्रस्ताव शासन को भेजा गया है
  • लेकिन अभी तक बजट स्वीकृत नहीं हुआ

वहीं, शिक्षक संघ अध्यक्ष अमित कण्डारी ने कहा:

  • हर साल प्रस्ताव भेजे जाते हैं
  • फिर भी समस्या का समाधान नहीं हो रहा

शिक्षा और सुरक्षा पर बड़ा सवाल

विशेषज्ञों का मानना है कि:

  • जर्जर स्कूल भवन बच्चों के लिए खतरनाक होते हैं
  • सुरक्षित वातावरण में ही गुणवत्तापूर्ण शिक्षा संभव है

इसलिए, प्रशासन को इस मामले में तत्काल कदम उठाने चाहिए।


जल्द समाधान नहीं हुआ तो हो सकता है आंदोलन

ग्रामीणों ने संकेत दिए हैं कि:

  • यदि जल्द निर्माण कार्य शुरू नहीं हुआ
  • तो आंदोलन किया जा सकता है

इससे, मामला और गंभीर हो सकता है।


निष्कर्ष

चमोली दुआ स्कूल जर्जर भवन सिर्फ एक स्कूल का मामला नहीं,
बल्कि बच्चों की सुरक्षा और भविष्य से जुड़ा बड़ा मुद्दा है।

यदि प्रशासन ने समय रहते कदम नहीं उठाए,
तो यह लापरवाही किसी बड़े हादसे का कारण बन सकती है।


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